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अजित वाडेकर, कपिल देव और राहुल द्रविड़ को भारत के महान कप्तानों में शामिल किया जाता है क्योंकि इन तीनों की कप्तानी में टीम इंडिया ने इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज जीती है। टीम इंडिया इंग्लैंड के खिलाफ इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज के लिए कमर कस रही है ऐसे में सवाल यह है कि क्या कप्तान विराट कोहली इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज जीतने वाले कप्तानों के एलिट क्लब में शामिल हो पाएंगे। अगर इंग्लैंड में फतह हासिल करना है तो टीम को रखना होगा इन चार बातों का ध्यान।
क्रिकेट का सबसे फेमस फंडा है, लपको कैच और जीतो मैच। यानी अगर मैच में आप जितनी बार कैच टपकाते हैं उतनी ही बार आपके जीत की उम्मीद कमजोर पड़ती जाती है। वैसे फील्ड कैचिंग के मामले में भारत कहीं से कमजोर नजर नहीं आता। अगर कहीं कमजोरी है तो वह है स्लिप कैचिंग में।पिछले साल दिसंबर में टीम इंडिया साउथ अफ्रीका पहुंची तो वहां भारत ने पेसर्स की बॉल पर स्लिप में 45 कैच टपकाए, जबकि केवल 32 कैच लपके। नतीजा यह रहा कि भारत टेस्ट सीरीज में 0-2 से पिछड़ गया। अंतिम टेस्ट में भारत ने स्लिप में कोई कैच नहीं टपकाया वहीं मेहमान टीम ने स्लिप में विराट कोहली को दो बार जीवनदान दिया। नतीजा पलट गया और भारत जीत गया।
इंग्लैंड की टीम टेस्ट सीरीज के दौरान बहुत हद तक कप्तान जो रूट पर निर्भर रहेगी। रूट ने अभी तक 69 टेस्ट खेले हैं और इंग्लैंड ने इसमें से 26 मैच जीते हैं और 15 में ड्रॉ खेला है। जीते मैचों में रूट का ऐवरेज 74.6 का रहा है जबकि ड्रॉ छूटे मैचों में 58.0 का ऐवरेज रहा है। जिन टेस्ट में इंग्लैंड को हार मिली है उसमें रूट 34.2 की ऐवरेज से ही रन बना पाए हैं। अगर भारत ने रूट पर कंट्रोल पा लिया तो फिर वह इंग्लैंड की जड़ें हिला सकता है।
भारत को विपक्षी स्पिनर्स को भी हावी होने से रोकना होगा। विदेशी टीम का एक स्पिनर ही भारत को बैकफुट पर भेजता रहा है। पिछले दौरे पर मोईन अली ने अकेले 19 विकेट झटके थे। मोईन इस बार भी टीम में हैं और उनसे भारतीय बल्लेबाजों को बचकर रहना होगा।
इंग्लैंड के खिलाफ 2014 में पिछले दौरे पर विराट कोहली जेम्स एंडरसन 4 बार शिकार बने थे। ऐसे में उन्हें मौजूदा दौरे पर भी पेसरों की चुनौती पर पार पाना होगा। इसके अलावा अन्य कुछ रेकॉर्ड्स पर भी ध्यान देना होगा।
इंग्लैंड का पिछला दौरा विराट कोहली के लिए किसी बुरे सपने की माफिक रहा था। तब इंग्लिश पेसर्स ने उन्हें फ्रंट फुट पर आने नहीं दिया और जब विराट ने फ्रंट फुट पर आकर ड्राइव करने की कोशिश की, स्लिप में लपके गए। पिछले दौरे पर विराट छह बार स्लिप में लपके गए थे। जिसमें से एक कैच विकेटकीपर ने लपका था, जबकि तीन कैच पहली स्लिप में और दो कैच सेकंड स्लिप में लपके गए थे। इनमें से एक बार भी बॉल न तो स्ंटप में जा रही थी और न ही उनके पैड पर। विराट चाहते तो इन बॉल्स पर अपना बल्ला अड़ाने से बच सकते थे। अगर विराट पारी की शुरुआत में ऑफ साइड से बाहर की ओर निकलती बॉल पर थोड़ा संयम बरतते हैं तो फिर समझ जाएं कि इंग्लैंड की मुश्किलों की शुरुआत हो चुकी है।
टेस्ट मैचों में भारतीय टीम के स्पिन अटैक की जिम्मेदारी आर अश्विन और रविंद्र जाडेजा लंबे समय से निभा रहे हैं, लेकिन एक हकीकत यह भी है कि प्रतिकूल हालात में ये दोनों स्पिनर्स जूझते नजर आए हैं। अश्विन का ओवरऑल ऐवरेज 25.34 का है, लेकिन जब वह सीमर फ्रेंडली कंडिशन में उनका ऐवरेज 50.74 का हो जाता है। वहीं जाडेजा इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका में खेले टेस्ट मैचों में 46.16 का ऐवरेज दे पाए हैं। दूसरी ओर चाइनामैन बोलर कुलदीप यादव विदेशी पिचों पर कुलदीप लगातार अच्छी बोलिंग कर रहे हैं। साल की शुरुआत में साउथ अफ्रीका दौरे पर उन्होंने वनडे सीरीज में 17 विकेट चटकाए। इंग्लैंड के खिलाफ पहले टी20 मैच में 5/24 का फिगर और पहले वनडे में 6/25 का फिगर बताता है कि कुलदीप को टेस्ट इलेवन में मौका मिला तो वह भारत के ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं।
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